बुधवार, 4 मई 2011

ऐ दिल !

ऐ मेरे दिल तू ऐसा नहीं था कभी,
क्यूँ भला तू अचानक बदलने लगा है |
तू न मचला था यूँ तो पहले कभी,
जिस तरह आज कल तू मचलने लगा है |
तू धड़कता तो था पहले भी मगर,
यूँ नहीं जैसे अब तू धड़कने लगा है |
तेरी धडकनों में आई कहाँ से जुबाँ,
जो उनका नाम अब तू रटने लगा है |
ऐ मेरे दिल........

तू था मेरा वफादार और मेरा हमनशीं,
न जाने क्यूँ आज कल तू बहकने लगा है |
यूँ तो रहता है तू मेरे ही जिस्म में मगर,
क्यूँ उनकी ख़ुशबू में अब महकने लगा है |
तेरी सोहबत भी तो बुरी नहीं है 
फिर भी जाने क्यूँ तू बिगड़ने लगा है |
मेरी भी कही एक सुनता नहीं,
मेरा हो के मुझसे ही झगड़ने लगा है |

ऐ मेरे दिल तू ऐसा नहीं था कभी,
क्यूँ भला तू अचानक बदलने लगा है |

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत रोचक और सुन्दर अंदाज में लिखी गई रचना .....आभार

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  2. क्या बात है..बहुत खूब....बड़ी खूबसूरती से दिल के भावों को शब्दों में ढाला है.

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  3. I am thinking to post my facebook poem here whats your opinion bro..

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