गुरुवार, 25 अगस्त 2011

अच्छा है...


यूँ समंदर में अकेले डूब जाना अच्छा है
यूँ आसमा में दूर तन्हा उड़ जाना अच्छा है
कोई छोड़ दे रस्ते में साथ अपना तो
ज़िन्दगी ये तन्हा  और तन्हा जी जाना अच्छा है...


यूँ  शिशिर की रात  में ठिठुर जाना अच्छा है
यूँ पवन के झोकों में बह जाना अच्छा है
कोई ग़म दे दस्तक अगर दिल पे बार- बार 
तो ऐसी याद से दूर और दूर हो जाना अच्छा है

उनके ख़्वाबों में खुद से अन्जान हो जाना अच्छा है,
अपनी ही धडकनें सुन हैरान हो जाना अच्छा है,
  यकलख्त मिल जाए यहाँ गर भीड़ में सनम
   भीड़ में गुमनाम और गुमनाम हो जाना अच्छा है   
  
तारीकियों  की गोद में सो जाना अच्छा है,
   बगैर उनके इश्क के साँसें थम जाना अच्छा है,
   ग़लतफ़हमी की आग में कभी जलने से पहले,
        "शिप्रा" का अपनी ही लहरों में फ़ना और फ़ना हो जाना अच्छा है|
 

I AM WAITING....



You didn't say good bye, while leaving
and i was standing there, crying n bleeding....
what was my mistake, my fault or sin
only dream of you,that was i dreaming???
You left me alone, absolutely forlorn
this is the day, i was always dreading ...
And I remained here, crying n bleeding..
i wanted to stop you, & call your name ,
but my voice was choked, n i was damn lame...
i couldn't follow your trail, the path you were leading 
and i m still here crying, bleeding & waiting.....
and i will be here waiting, waiting  & waiting.....

शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

कहानी :अन्ना और कांग्रेस

                              एक समय की बात है, कहीं दूर एक "भारत" नाम की बगिया थी | बगिया में २८ बड़े और ७ छोटे, कुल मिलाकर ३५ पेड़-पौधे थे | बहुत सुन्दर बगिया थी वो |  हर पेड़ पर ढेर सारे घोसले थे जिनमे तरह-तरह के पक्षी रहते थे | वो सब पक्षी दिन भर मेहनत करके अपने बच्चों के लिए दाना लाते थे | सब बिलकुल सुखपूर्वक रह रहे थे |                                         एक दिन वहां "कांग्रेस" नाम का एक कुत्ता आया | वो बहुत भूखा और कमज़ोर था | उसने पक्षियों से भोजन माँगा | पक्षियों को दया आ गयी | उन्होंने उसे अपने बच्चो के लिए लाये हुए भोजन  में से कुछ  खाने को दे दिया | कुत्ता भोजन करके बहुत प्रसन्न हुआ | उसने पक्षियों से कहा, "आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद | आपने मेरा जीवन बचाया है | मुझे आप अपना एहसान चुकाने का एक अवसर दें |"
      पक्षी कुत्ते के आत्मसम्मान की भावना से बड़े प्रभावित हुए | उन्होंने कुत्ते से कहा, " तुम हमारे लिए एक काम कर सकते हो | हम सभी पक्षी पूरे दिन भोजन की तलाश में बाहर रहते है| हमारे बच्चे और अंडे यहाँ घोसलों में असुरक्षित रहते है | तुम इनकी यहाँ रहकर सुरक्षा करो, बदले में हम तुम्हे रोज़ भोजन दिया करेंगे |"
              कुत्ता ख़ुशी-ख़ुशी तैयार हो गया | पक्षी अगले दिन से निश्चिंत होकर भोजन की खोज में जाने लगे | वे शाम को लौट कर कुत्ते को भोजन देते | सब कुछ इसी प्रकार कुछ दिनों तक चलता रहा | किन्तु एक शाम जब पक्षी वापस लौटे तो उनके घोसलों से कुछ अंडे गायब थे | पक्षियों ने कुत्ते से पूछा तो,"आज आप लोगों के जाने के सांप आया था उसने कुछ अंडे खा लिए, मुझे इस बात का अत्यंत खेद है किन्तु अब चिंता की कोई बात नहीं है | मैंने उस सांप को भगा दिया है | वह अब यहाँ आने की हिम्मत कभी नहीं करेगा |"
पक्षी कुत्ते की बहादुरी की प्रशंसा करते हुए अपने अपने घोसलों में लौट गए | लेकिन अब ऐसी  घटनाएँ रोज़ होने लगी | सारे पक्षी बहुत परेशान थे | तभी अन्ना नाम वाले बूढ़े बुद्धिमान कबूतर ने एक उपाय सुझाया | उसने कहा," हम सब लोग जब यहाँ से चले जाते हैं फिर यहाँ क्या होता है हमे नहीं पता| इसलिए अब से हम में से कोई  एक पक्षी लोकपाल बनेगा और यहाँ रह कर निगरानी करेगा | " अगले दिन से एक पक्षी रुक कर निगरानी करने लगा तो यह पाया की कांग्रेस ही उनके अण्डों को खा रहा थी | लोकपाल ने यह बात सभी पक्षियों का यह बात बताई तो वो गुस्से से कांग्रेस पर हमला करने जाने लगे | अन्ना ने उन्हें रोका और कहा," हमे यह सब शान्ति पूर्ण ढंग से करना चाहिए | हम शांति से कांग्रेस को यहाँ से जाने के लिए कहेंगे |" 
                        सारे पक्षी कांग्रेस के पास गए और अन्ना ने उसे उसके कुकृत्य के बारे में बताते हुए वहाँ से निकल जाने को कहा | हडबडाहट और भय में कांग्रेस ने अन्ना पर हमला करके उसे निगल लिया | बाकी सभी पक्षी यह देखकर गुस्से में कांग्रेस पर चोंच मारने लगे | उधर अन्ना भी पेट के अन्दर चोंच मारने लगा | कुत्ते ने अन्ना को उगलना चाहा लेकिन अन्ना जान गया था कि वह अन्दर से ज्यादा चोट पहुंचा सकता है | उसने अपने पंजे अन्दर ही गड़ा दिए और चोंच मारता रहा |  इस तरह कांग्रेस मर गया और अन्ना पेट फाड़कर बाहर आ गया |


(अब देखना यह है कि इस कांग्रेस नाम के भेड़िये का पेट कब फटता है |) 

सोमवार, 15 अगस्त 2011

कल और आज ...

चल रहे है आज भी हम यहाँ
राह भी वही रहगुजर है वही
 बस किस्मत ही बदल गयी चलते हुए
इसमें नहीं दोष रहा इन क़दमों का |


हम चले थे आज भी उसी साहिल से
नही है तो बस साथ  लहरों  का
ये  तूफाँ  ही बहा ले गया दूर उसको
 इसमें  नही दोष रहा इन  बूंदों  का |

मंजिलें थी तो आज भी  वहीँ
और टिका साहिल भी  वहीं था
कुछ साथ न था तो वो गुजरा कल
इसमें नहीं दोष  रहा इन  लहरों  का |


यहाँ के नज़ारे आज भी उतने हसीं हैं
की हर दिल यहाँ फिर से  जवाँ हो जाते हैं
ओझल हो गई तो बस अपनी खिलखिलाहट
 इसमें नहीं दोष  रहा इन  नज़रों का |

रविवार, 14 अगस्त 2011

जलन



ढूद्ती रहती है नज़रें हर घडी उनको ,
सहर से शाम तलक याद करें हम उनको | 
वो काश मेरे होते तो गम कैसा,
न मिले तो दिल पर क्या बीतेगी क्या पता उनको 


                                   सांझ की दहलीज पर  दिखा  रौशनी सा है,
                                    जाने दिल है जला या जला है दिया |
                                    जलन की आग सुलग रही है ऐसे,
                                     कितने सपने जला गई क्या पता उनको|

शनिवार, 13 अगस्त 2011

बचपन की याद.....


है सावन की बरसात याद
है बचपन की हर बात याद 
जब काले बादल होते थे 
घनघोर घटा भी बरसी थी 
उस बारिश में हम भीगे थे
उन बूंदों को भी पकडे थे
फिर कागज़ की नाव बनाकर 
बारिश में दूर बहाते थे
उस नाव के पीछे-पीछे
कुछ दूर निकल भी जाते थे
जब कीचड़ में थे पैर पड़े 
गिरते-थमते गिर जाते थे
है  सावन की बरसात याद
है बचपन की  हर बात याद

तब के दिन थे कितने अच्छे 
 सारे अपने थे कितने सच्चे 
 अब तो दुनिया भी झूटी है
  हर एक को फरेब ने लूटी है
  जब बड़े हुए तो पता चला 
  थे दुनिया से अनजान भला 
   बचपन में न चिंता थी
   अपनी न कोई निंदा थी 
  वो रात सुहानी होती थी 
  माँ की लोरी सुनती थी
  फिर नींद की रानी  आती थी 
 सपनो का महल सजाती थी 
  न ऐसी रात कभी आई 
  न नींद की रानी फिर आई
 वो  सपने अपने टूट गए   
वो सच्चे सारे छूट गए 
 बारिश वो सहसा थम गयी
बस बचा  रहा तो वही डगर 
बस बचा  रहा तो वही शहर 
वो ख़ुशी कही अब रही नही 
बस बची रही तो याद वही 
बस बची रही तो याद वही....

है बारिश  की वो बात याद
है बचपन की हर बात याद...

शुक्रवार, 12 अगस्त 2011

आज बारिश में......


 हमें छोड़ कर न कहीं जाओ, आज बारिश में 
थोड़ी देर और ठहर जाओ, आज बारिश में
जैसे ये बूँदें समायीं थीं बादलों में अब तक 
वैसे तुम मुझ में समां जाओ, आज बारिश में |

थाम लो हाथ मेरा, ज़रा देर मेरे संग चलो
दो कदम साथ निभाओ, आज बारिश में 

जैसे ज़मीं की प्यास बुझा दी है  बादलो ने आकर 
मेरे दिल की भी आग बुझाओ, आज बारिश में |

 जलती शबनम को होंठों से लगाने की है ख्वाहिश मेरी 
आग से आग बुझाओ , आज बारिश में 

अब लाज-ओ-हया की अदा बहुत हुयी 
सनम अब और न शरमाओ, आज बारिश में 

हमें छोड़ कर न कहीं जाओ, आज बारिश में
थोड़ी देर और ठहर जाओ, आज बारिश में |

शनिवार, 6 अगस्त 2011

प्रीत कहाँ??



कहते हैं ये है प्रेम जगत 
पर प्रीत कहाँ?? अरे ! प्रीत कहाँ ?

सुनते है सब रोज़ ग़ज़ल 
गीत कहाँ ? अरे गीत कहाँ ??

जलते हैं चराग अब हर घर में 
पर दीप कहाँ ?? अरे दीप कहाँ ??

छिड़ते है राग सभी दिल में 
संगीत कहाँ ?? संगीत कहाँ ??

गुलजार गुलिस्तान होता है
पर फूल यहाँ पर रोता है, 

सब जीते है दुनिया की ख़ुशी 
पर जीत कहाँ?? अरे जीत कहाँ??

मिलते है सभी दुनिया में मगर
अब मीत कहाँ?? अरे मीत कहाँ ??

कहते हैं ये है प्रेम जगत 
पर प्रीत कहाँ?? अरे ! प्रीत कहाँ ??

बुधवार, 3 अगस्त 2011

मैं आज भी वहीँ हूँ..



मैं आज भी वहीँ हूँ
वहीँ उसी मोड़ पर
जहाँ गए थे तुम छोड कर 
वहीँ फूलों के बीच 
बारिश की झिलमिल बूंदों से सजी 
हाँ मैं अब भी वहीँ हूँ 
तुम्हारी आस में 
सुलगती प्यास में 
पर आँसू नहीं बहने देती |
अपने नसीब पर मुस्कुराती हुई 
अपने ग़मों को छुपाती हुई 
हाँ मैं आज भी वहीँ हूँ
वहीँ उसी मोड़ पर
जहाँ गए थे तुम छोड कर .....

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