बुधवार, 10 नवंबर 2010

नाम

लिख कर इक नाम दिल पर, कभी मिटा न सके |
तुमसे कहने की हिम्मत भी तो, जुटा न सके |
लम्हे तन्हाईयों के, हमने भी गुजारे लाखों,
फिर भी इक पल क्यूँ तेरे साथ, हम बिता न सके |
लिख कर इक नाम.......

यूँ तो धड़कन ने भी बढ़ कर के, पुकारा तुमको |
लब थे ख़ामोश मगर इन ने भी, था चाहा तुमको |
मेरे अरमाँ भी तो बिछे थे, राहों में तेरी |
क्या थी मजबूरी, कि तुम जो कभी आ न सके |
लिख कर इक नाम......

छोड़ देंगे ये गली, गाँव, शहर, और दुनिया,
तुम नहीं मेरे तो, मेरा है भला कौन यहाँ |
तुम थे हर दम मेरे, मेरे और बस मेरे |
क्या थी हम में कमीं, हमको जो तुम अपना न सके |
लिख कर इक नाम......

लिख कर इक नाम दिल पर, कभी मिटा न सके |

4 टिप्‍पणियां:

  1. छोड़ देंगे ये गली, गाँव, शहर, और दुनिया,
    तुम नहीं मेरे तो, मेरा है भला कौन यहाँ |
    तुम थे हर दम मेरे, मेरे और बस मेरे |
    क्या थी हम में कमीं, हमको जो तुम अपना न सके |
    लिख कर इक नाम......

    पंक्तियों ने बेहद प्रभावित किया.........सुन्दर एवं भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकार करें !!

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  2. बहुत खूब मेरे भाई...........

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  3. superb lines.bahut hi acchi abhivyakti.per sabd thode bojhil se lage.prayash jaari rakhe aap isse accha likhne ka dum rakhte hai.waise mai kaun hu wo janana aapke liye aasaan ho jayega.neeche ki panktiya padhe.

    wo mere jajbaaton me chae rahe raatbhar.
    subah hui to paya unhe door khade muskarate hue.

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