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गुरुवार, 7 फ़रवरी 2013
रविवार, 20 जनवरी 2013
चिल्लर (तीसरी किश्त)
1
मेरी गुस्ताख़ नज़रों से जो बच पाओ तो बच लो तुम
नज़र का तीर है इसको कोई पर्दा क्या रोकेगा??
…………………………………………
2
बड़े अनमोल मोती हैं इन्हे यूं ज़ाया न करो
हर किसी की बात पर यूं मुस्कुराया न करो
इन खंजरों से होना क़त्ल बस मेरा ही हक़ है
मुस्कान के खंजर सब पे यूं चलाया न करो
…………………………………………
3
तेरी गली से गुजरता हूँ तो आँखें मूँद लेता हूँ
डर है कि तुझे देखा तो रस्ता भूल जाऊंगा
…………………………………………
4
वो मज़ा और वो सुकून अब नींद मे कहाँ ??
जो तेरी याद मे है जाग के आँसू बहाने में ...
…………………………………………
5
चमकते चाँद से पूछो पिघलती रात से पूछो
कितने आँसू बहे मेरे ये इस बरसात से पूछो
…………………………………………
6
मुझे जब नींद आई तो भी मैं सोया नहीं
मेरे ख्वाबों भी तुम मुझको छोड़ जाते हो
…………………………………………
7
फेहरिस्त-ए-आशिकान मे सबसे ऊपर नाम मेरा लिख दो
मैं इक गुमनाम शायर हूँ, नाम बदनाम मेरा लिख दो
…………………………………………
8
तेरा ही नूर है मुझमे, तुझे बाहर मे क्यूँ ढूँढूँ
जब तेरी याद आती है, मैं आईना देख लेता हूँ
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9
वो प्यार करेगी तुमसे, उसे प्यार करने की वजह तो दो
ज़रा दिल साफ करो, उसे दिल मे रहने की जगह तो दो
…………………………………………
10
तेरे आने से मेरी ज़िंदगी यूं गुलशन है कि
दश्त-ए-ग़म मे भी अब चाहत के फूल खिलते हैं....
…………………………………………
11
दिल चाहा के तुझको बुला लूँ चुपके से मैं ख्वाबो में
ये भी तो हो न सका लेकिन,मुझे नींद न आई रातों में
…………………………………………
12
कोई नहीं शरीफ यहाँ, बस शरीफ बनते हैं
नकाब लगाकर ही ये घर से निकलते हैं
किसी के आँसू किसी की हंसी का कारण है
दर्द ओ ग़म से भी लोगों के दिल बहलते हैं
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13
आधी रात अकेले मे जब नींद नहीं आती हमको
सोच के तेरी बातों को तन्हा मुसकाया करते हैं
…………………………………………
14
इस लफ्ज को हम जानते थे पहले भी मगर
वो अजनबी हमें प्यार का मतलब सिखा गया
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15
दिल पर नहीं है ज़ोर, इसको रोक लूँ कैसे
फिर चल पड़ा है देखो मोहब्बत की राह पे
…………………………………………
16
मैं हूँ दर्द का सौदागर, मैं दर्द बेचता हूँ
जब दर्द न हो तो भरे जख्म कुरेदता हूँ
कहने को तो सुख़न में सुख आता है मगर
यहाँ दुख से भरा हर सुख़नवर देखता हूँ...
…………………………………………
17
उनकी नफ़रतों से दिल जाने क्यूँ प्यार कर बैठा
बेगुनाही को अपनी ये गुनहगार कर बैठा
करने आए थे कुछ और, और कुछ और कर बैठे
इश्क़ की बेखुदी मे क्या न जाने यार कर बैठा
…………………………………………
18
कल राह मे अचानक किसी ने नाम पूछा तो
बेखयाली में हम उनका नाम कह गए
आज जब उन्होने कहा मेरी तारीफ करो तो
जाने हम क्यूँ खुदा का कलाम कह गए
…………………………………………
19
पुकार लेना मुहब्बत से जो दिल चाहे अकेले में
इन नामों की नुमाईश जहाँ में मगर अच्छी नहीं लगती
…………………………………………
20
किसी के इश्क में पड़कर भी कभी देखिये "विक्रम"
उसकी बदसलूकी भी अदा इक शोख़ लगती है .
…………………………………………
21
वो समझेंगे कभी तो, बस तू समझाए जा
बुझाने दे चराग उनको, तू फिर जलाए जा
कहाँ जा रहे हैं वो, खुद उनको नहीं पता
वो सुनें न सुनें राह तू उनको बताये जा
…………………………………………
22
उनसे कह तो दिया कि तन्हा ही जी लेंगे मगर
तन्हाई में जीना हमें आता ही कहाँ है....
…………………………………………
23
क्या कहें तुमसे कि हमें ग़म है क्यूँ
क्या बताएं तुम्हे ये आँखें नम है क्यूँ
जलने कि है आदत मेरी, चुपचाप जलने दो
मत पूंछो कि इस दिल में जलन है क्यूँ
…………………………………………
24
कभी खुद की न थी फिक्र, मौत से डर न था मुझे
जब से तू मिला है यार, बड़ा संभल के चलता हूँ
…………………………………………
25
अपनी इन अदाओ से मेरा दिल ले लिया तूने
नज़र से मारकर मुस्कान से ज़िंदा किया तूने
…………………………………………
26
हर तरफ है रोशनी, है हर सू उजाला
सचमुच तेरे शहर की रात अलग है
…………………………………………
27
मेरे सनम, तुम भी कमाल करते हो
खुद जवाब हो फिर भी सवाल करते हो
…………………………………………
28
तरीके कत्ल के जहां मे और भी है मगर
तुम्हारे इस तरीके से मरने में मज़ा है
…………………………………………
29
सौ बार कहा दिल से, तू उनको याद न कर
बहरा है तेरा खुदा उस से फरियाद न कर
नादान है मेरा दिल मेरी इक मानता नहीं
तड़पेगा रात-ओ-दिन ये शायद जानता नहीं
…………………………………………
30
तेरी हर खता-ओ-गुनाह को तो मैं माफ कर दूंगा
पर ये बता क्या भूल मेरी तू भूल पाएगा
पिछली दो किश्तें-
1- कुछ चिल्लर
मंगलवार, 26 जुलाई 2011
कुछ और चिल्लर.....
१. न ये धरती न वो आसमाँ चाहता हूँ...
बस मैं तेरा करम मेहरबाँ चाहता हूँ...
तेरे पहलू में मौत की है ख्वाहिश मुझे...
मैं हूँ परवाना, मैं बस शमा चाहता हूँ ...
२. May be u don't feel like i feel
everyone has his choice
it's not a big deal
but do one thing
give me back my heart
i have lost this game
before u, i kneel.....
३.वो लड़की रोज़ मेरे ख़्वाबों में आ जाती है,
सोये अरमानों को वो हर रात जगा जाती है,
उस से तन्हाई का शिकवा भी तो कर सकता नहीं
रोज़ मिलने का वडा भी वो निभा जाती है|
वो लड़की रोज़ मेरे ख़्वाबों में आ जाती है....
४. बड़े शौक़ से वो फिर हमें आजमाने आये,
इस बार इज़हार-ए-मोहब्बत बहाने आये
उनका इश्क दिल्लगी से ज्यादा कुछ नहीं,
और वो मेरे इबादत से इश्क का मजाक बनाने आये |
५.अपनी बस एक गलती की सजा इतनी मिली है
मौत से बदतर तन्हाई की ज़िन्दगी मिली है
अपनी धडकनें भी तो अब बेगानी लगती है
आह की शक्ल में हमें सांस आखिरी मिली है |
६. कल नशे में मैंने यारो जाने क्या क्या कह दिया
अपने दिल को अपने ज़िस्म से जुदा कह दिया
इश्क की मदहोशी का आलम तो देखिये
मुझ काफिर ने उन्हें इकलख्त अपना ख़ुदा कह दिया
७. मेरे दिल को कई ख्वाब वो दिखाने लगी है
मेरे ज़ेहन में अपना घर वो बनाने लगी है
वो जानती है कि अदाएं उसकी कातिल हैं मगर
फिर भी अदाएं वो हम पर आजमाने लगी है.....
८. सूनी तन्हा रातों में अकेला जागता हूँ...
जाने क्यों खुद से ही इतना भागता हूँ ....
जब सो जाती है सारी दुनिया सुकून के साथ...
तब खुद से खुद के गुनाहों की सज़ा मांगता हूँ |
९. अपने एहसासों को भी लफ्ज़ दे देते थे
अपने जज्बातों को शेरों में बदल देते थे
उनसे कहने की हिम्मत कभी होती न थी
तो वो शेर facebook पे छाप देते थे
आज जाना, जब उनकी profile खोली
वही शेर वो boyfriend को forward कर देते थे ......:'
१०. फिर से कोई हमें तन्हाई का मतलब सिखा दे, कह दो ...
मेरे ख्वाबो को को मेरी नींदों से मिटा दे, कह दो ....
नहीं जलना है मुहब्बत की आग में मुझको,
के मेरे अरमानों की आग कोई बुझा दे, कह दो....
११. There was a time when u were my best friend
and you were with me for my whole life...
and then here i am......in love with you.....
& losing you when you became my life
१२. कभी कभी ख़ुद को समझना भी कितना मुश्किल हो जाता है ....
तुम किसी और के हो ये जानकर के भी
पगला है दिल, जो तुमको चाहता है...
तुमसे बात करने से तुम और अपने लगते हो
तुमसे बात करने से सो दिल और घबराता है
न करे गर बात हम तुमसे तब भी तो चैन नहीं आता
जो न देखें कभी तुमको तो दिल आंसू बहाता है .....
कभी कभी ख़ुद को समझना भी कितना मुश्किल हो जाता है ....
१३. ज़िन्दगी है नादान इसीलिए चुप हूँ,
दर्द ही दर्द सुबह शाम इसीलिए चुप हूँ,
कह दू ज़माने से दास्ताँ अपनी,
उसमे आएगा तेरा नाम इसीलिए चुप हूँ
१४. हम उनकी ख़ामोशी से भी उनके दिल की हर बात ही पढ़ लेते है,
और वो मेरी हर बात से कहानियाँ कुछ और ही गढ़ लेते है
१५. छोड़ा न था दोस्तों ने साथ मेरा तब तलक
जब तलक तार उनके दिल का किसी ने छेड़ा न था
१६. तुम्हारी याद में तड़पते हम आज भी हैं
मिलने की ख़ुशी जुदाई का ग़म आज भी है
अब तो आता है तरस खुद पर, और इश्क पर अपने
फिर भी जाने क्यूँ इश्क पर दिल को नाज़ आज भी है
(बाकी फिर कभी)
बुधवार, 13 जुलाई 2011
कुछ चिल्लर(१)....
१.जब जब आईने में क़ैद वो इंसान देखा |
तब तब खुद में छुपा हुआ इक शैतान देखा |
सारी दुनिया को दिखाता था गुलिस्तान-ए-नेकी जिसमें |
उसी दिल में दफन बदी का बियाबान देखा |
२.अपनी ही उलझनों में खोया सा हूँ मैं |
जागते हुए भी लगता है कि सोया सा हूँ मैं |
आँखें भी तो मेरी नम हुयी नहीं मगर |
लगता है जाने क्यूँ के रोया सा हूँ मैं |
३.उनकी जुदाई में तड़पते हैं इस क़दर |
खुद की नहीं खबर, करार है भी या नहीं |
तन्हाईयों ने हमें सताया कुछ कम न था |
उस पर ये कशमकश के उन्हें प्यार है भी या नहीं |
४.वो सिखाते हैं हमें आज ज़िन्दगी का सबक |
नहीं जानते के हमने हर तारीख देखी है |
देखा है सफेदपोशों के चेहरे पे नकाब |
गोरे चेहरों के पीछे लगी कालीख देखी है |
उनसे कह दो न रहे किसी गफ़लत में वो |
हमने हर सच के गले झूठ की तावीज़ देखी है |
५. ज़िन्दगी न और अब तू मेरा इम्तिहान ले |
जल जल के थक गया हूँ कसौटी की आग में |
६.ज़िन्दगी बता कैसे मैं तेरा ऐतबार कर लूँ
तू भी तो साथ मौत को छुपा कर के लायी है |
७.सीने में एक आग सी लगी है जो 'विक्रम' |
इश्क के शोलों से हैं वो, उसको बुझा रहे |
८.हारने का नहीं, है मुझे बस जीतने का दर |
हर जीत पर है मेरे दुश्मनों की तादाद बढ़ गयी |
९.मेरे शायरी के शौक ने मुझे देखो ला दिया है कहाँ |
अपने ग़मो पे भी अब तालियों की उम्मीद रखता हूँ |
१०.क्यूँ रहूँ बदनाम मैं बेवजह, बेक़सूर |
मेरी बदनामियों को इक वजह तो दे दो |
नींदें उजड़ी मेरी ख्वाब बेघर हुए |
अपनी नींदों में इन्हें थोड़ी जगह तो दे दो |
११.लम्बा है सफ़र इसमें कोई आसरा तो हो |
नजदीकिय न हो न सही, फासला तो हो |
तेरी गली में आके कभी, हो जायें हम बदनाम |
चाहत का नहीं नफरत सही, कोई माज़रा तो हो |
१२.आशियाना मेरा जलाकर देखो वो,
हैं रकीबों घर रौशन कर रहे |
मेरी खताओं की सजा मुझे देने के लिए
मुझ पर नहीं, हैं वो खुद पर सितम कर रहे |
१३.चाँद घटता रहा, रातें बढती रही
मैं तड़पता रहा, तू तड़पती रही
बात थी एक ही दोनों के दिल में मगर
मैं वो कह न सका, तू छुपाती रही
१४.जाते हुए तुमने हमें मुड़कर नहीं देखा |
अरे ऐसा भी क्या गुस्सा कि इक नज़र नहीं देखा |
नहीं देखे हैं हमने फूल कभी नाज़ुक तेरे जैसे |
मगर हाँ सच है कि तुमसा कभी पत्थर नहीं देखा |
१५.you are 'R' of my heart
without you my heart is incomplete
with you it keeps me alive
without you i am left with just 'heat'.
(कुछ छुट्टे और भी हैं, वो फिर कभी.....)
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