ख़त लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
ख़त लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 5 मार्च 2012

गुजारिश




बेशक गुज़रो मेरी गली से, मगर नकाब ओढ़ के | 
न गिराओ किसी पर बर्क-ए-हुस्न मुझे छोड़ के |

ये बिजलियाँ मुझ पे गिराओ मैं जलना चाहता हूँ 
हद है तेरा हुस्न, मैं हद से गुजरना चाहता हूँ 

हदें तोड़ जमाने की, मुझ पर एतबार तो कर |
मैंने सौ बार किया, तू भी इक बार तो कर |

तू भी इक बार किसी से प्यार कर के तो देख |
सर्द रात छत पे किसी का इंतज़ार करके तो देख |

किसी का इंतज़ार गर न मज़ा देने लगे तो कहना,
बाद-ए-सबा भी उसका न पता देने लगे तो कहना 

बाद-ए-सबा बनीं क़ासिद-ओ-हमराज़ प्यार मे देखो | 
उड़ा के ले गयी ख़त वो मेरा आज प्यार मे देखो |

ख़त मे था लिखा, जो हवा आई उनके घर छोड़ के |
बेशक गुज़रो मेरी गली से, मगर नकाब ओढ़ के |  


गुरुवार, 20 अक्टूबर 2011

ख़त



जनवरी की सर्द रात, एक कम्बल 
और कुछ अटपटे ख़याल
थोड़ी सी मदहोशी, कुछ चाय के प्याले 
और मन मे उठे सवाल 
कुछ पुरानी यादें, और वो नज़्में 
जो तुमने गुनगुनायी थीं 
तुम्हारी बातें, और मेरी पुरानी गजलें 
जो मैंने तुम्हें सुनाई थीं 
मेरी गुस्ताख़ शरारत पे 
तुम्हारी हया भरी डांट
हमने बूढ़े पीपल पे लगाई थी 
जो लाल डोरी की गांठ 
कुछ खत जो कभी भेजे नहीं 
और वो बातें जो कही नहीं 
जिस्मों के ये फासले और
दिलों मे दूरिया जो रही नहीं 
वो बेचैनी मे बदली गयी करवटें 
और तनहाई मे भरी गयी आह 
वो पूनम के चाँद को देखकर 
तुमको छू लेने की चाह 
वो किताबों से निकले 
सूखे फूलों की महक 
तेरे चेहरे का ताब, 
तेरी साँसों की दहक
मेरे कुछ रंगीन ख्वाब, 
और आँखें तेरी शराब  


और भी बहुत कुछ मिला कर 
पकाया है जज़्बातों की आंच पर 
फिर कुछ देर ठंडा किया है 
रख के हसरतों के काँच पर।

कागज़ पे परोस कर 
इक ख़त तुम्हें भेजा है
ज़रा चख के ये बताना 
क्या नमक इश्क़ का सही पड़ा है??

मंगलवार, 12 जुलाई 2011

जवाब


ऐ खुदा ! इस बार तो मेरे ख़त का जवाब आ जाये
कागज़ के पैमाने में उनकी 'हाँ' की शराब आ जाये
ये मेरा वीराना भी हो जायेगा इक दिन गुलशन,
बस इक बार यहाँ वो हसीं गुलाब आ जाए

वो गुजरे भी मेरी गली से तो, पर्दा करके
कभी तो चेहरा वो, नज़र बेनकाब आ जाए

चांदनी रातो में भी मेरी दुनिया अँधेरी है
कभी मेरी छत पे भी तो महताब आ जाये

मैं फ़कीर-ए-इश्क खड़ा हूँ कब से दर पे
इक बार तो बाहर वहाब आ जाये

ऐ खुदा ! इस बार तो मेरे ख़त का जवाब आ जाये |

लोकप्रिय पोस्ट