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रविवार, 2 सितंबर 2012
रविवार, 18 मार्च 2012
सफ़र
हयात-ए-ग़म का ये सफर नहीं आसान मेरे यार,
यहाँ आएंगे अभी और भी तूफान मेरे यार |
ज़रा सी तीरगी से हो गए हो हिरासान मेरे यार,
ज़िंदगी है ये तारीकियों का उनवान मेरे यार |
लड़ना मुश्किलों से है हर इंसान की किस्मत,
इनसे मोड़ ले जो मुंह वो क्या इंसान मेरे यार??
आधे रास्ते से हारकर तुम लौट जाओगे ??
इस कदर न बनो तुम नादान मेरे यार |
कुछ पल ठहर तू, सांस ले फिर बढ़ा चल आगे
थक जाये गर तू सफर के दौरान मेरे यार
मौत तो आनी है, इससे डरता क्यूँ है तू ?
मौत आज़ादी और है ज़िंदगी ज़िंदान मेरे यार |
तू कर्म करता जा और न फल की चिंता कर,
खुद गीता में कहता है तेरा भगवान मेरे यार |
औरों के वादे कसमें सब भुला दो लेकिन,
करो याद खुद से खुद का पैमान मेरे यार |
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