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मंगलवार, 18 दिसंबर 2012

विक्रम


जो कोई पूछता है, कैसा तू इंसान है विक्रम
कभी शैतान है विक्रम कभी भगवान है विक्रम

वो कहते है समझ पाना तुझे मुश्किल बड़ा है यार
तू दिल से दिल मिलाकर देख बड़ा आसान है विक्रम

है मौसम सा मिजाज इसका पल भर मे बदलता है
कभी है जान-ए-महफिल तो कभी बेजान है विक्रम

बुरा न मानिए साहिब इसकी गफलतों का कुछ
चला जाएगा, पल दो पल का बस मेहमान है विक्रम

है इससे ताल्लुक क्या आपका न सोचिए साहिब
है सबसे आशना बस खुद से ही अंजान है विक्रम

रविवार, 17 जुलाई 2011

लोग

मुझसे मिलते ही मुझे सीने से लगा लेते हैं लोग
मेरी हर ग़ज़ल को होंठों पे सजा लेते हैं लोग
पर इन लोगों की याददाश्त है कमज़ोर बड़ी
मेरे पलटते ही मुझे दिल से भुला देते हैं लोग

अब तो वफ़ा की उम्मीद भी गफलत ही है
कहाँ किसी को वफ़ा के बदले वफ़ा देते हैं लोग

उजले बदन वालों के दिलों में घुप अँधेरा है
ज़मीर-ओ-जज़्बात के चराग बुझा देते है लोग

हबीबों और रकीबो की पहचान कैसे हो
नकाबों पे भी कई नकाब लगा लेते हैं लोग

है ये प्यार की दुनिया, है यहाँ प्यार बहुत
कि बड़े प्यार से प्यार को दग़ा देते हैं लोग

ऐसे लोगों को कैसे समझाओगे 'विक्रम '
ज़रा सी बात पे ही लाशें बिछा देते हैं लोग |

मुझसे मिलते ही मुझे...........

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