रविवार, 24 फ़रवरी 2013

बे-बहर ग़ज़ल



इजहार-ए-इश्क़ तो दोनों ने किया था
वो भी बदल गयी मैं भी मुकर गया

इक अज़ीज़ दोस्त था दिल के करीब था
मुसीबत के वक़्त में जाने किधर गया


ढूंढती रही नज़रे तुझको ही चारो ओर
नज़र को नहीं मिला, नज़र से उतर गया


कोई दर्द ही दे दे मुझे महसूस करने को
ये तो पता चले कि हूँ ज़िंदा कि मर गया


मज़मून ग़ज़ल का वो कभी जान न पाये
बस कहते रहे "हर शेर तेरा बे-बहर गया"


तस्कीं तुम्हें देने न आएगा कोई विक्रम
बधाई उन्हे देने को है सारा शहर गया

सोमवार, 11 फ़रवरी 2013

कहती रहो


मैं सुनता रहूँ
तुम कहती रहो 
रग रग में तुम यूँ ही 
मेरे तुम बहती रहो 

रात ढल जाने दो 
चाँद गल जाने दो
हो जाने दो सहर 
सूर्य जल जाने जो

बस कहती रहो
तुम कहती रहो


मैं सुनता रहूँ
तुम कहती रहो 


शब्द खोये हैं मेरे 
कुछ भी करूँ कैसे बयाँ 
तुम जानती हो सब 
कहने को बाकी क्या रहा 


बस तेरे ख्वाब खुद मे 
मैं बुनता रहूँ
तुम कहती रहो
बस मैं सुनता रहूँ

बीत जाये ज़िन्दगी 
तेरी बातों में यूँ ही 
तू है साथ तो मुझे  
मौत का भी डर नहीं 
काट लूँगा हर सफ़र 
संग जो तुम चलती रहो 


मैं सुनता रहूँ
तुम कहती रहो 
रग रग में तुम यूँ ही 
मेरे तुम बहती रहो 


बस कहती रहो 
बस...
कहती ही रहो.......

गुरुवार, 7 फ़रवरी 2013

मेरा नया घर


अब मैं यहाँ नहीं रहता
याद और ग़म की ये गली 
अब छोड़ दी है मैंने
मैंने नया घर बनाया है
उधर खुशियों की तरफ
मुस्कान के बगीचे के बगल मे 
मिलना हो अगर मुझसे 
आ जाना उधर कभी भी 
भूलने लगो अगर रास्ता
पूछ लेना किसी जुगनू से
घर तक छोड़ देगा......

बुधवार, 23 जनवरी 2013

खुशबू


तुम तो यहीं थी 
मेरे भीतर
एक खुशबू की तरह 

मुझे महकाती हुयी 
और मैं पागल 

ढूँढता रहा तुम्हें बाहर 
कस्तूरी मृग की तरह 


पर तुम चुप क्यूँ रही?

कुछ तो कहती

डांट ही देती मुझे
मेरी मूर्खता पर
या आनंद आता है
मुझे सताने मे 
यही बता दो अब



क्या मेरे कष्ट

मेरे दुख देख 

तुम्हें पीड़ा न हुयी
नहीं लगा तुम्हें 
प्रेम की खुशबू 
काफी नहीं है 
सहारा चाहिए था मुझे?



नहीं लगा यदि 

ऐसा कुछ तुमको 

तो फिर अब मुझमे 
बस कर नहीं कोई लाभ
छोड़ दो मुझे 
मेरे हाल पर
ले लो अपनी खुशबू 
मुझे महकने दो अब 
मेरी तरह


...........

सोमवार, 21 जनवरी 2013

बदलाव


दिन भी बदला रातें बदलीं 
बदले मौसम चार 
पर विक्रम वही का वही 

कपड़े बदले लत्ते बदले 
बदले साज श्रंगार 
पर विक्रम वही का वही 

शक्लें बदलीं अक्लें बदली 
कोई बदले रूप हजार 
पर विक्रम वही का वही 

रिश्ते बदले नाते बदले
बदले नेक विचार 
पर विक्रम वही का वही 

कुछ बुरे जो बदले अच्छे बदले 
कुछ बदल हुये बेकार
पर विक्रम वही का वही 

बाबा बदले नेता बदले
है दल बदलू सरकार 
पर विक्रम वही का वही 

ये विक्रम ससुरा क्यूँ न बदले 
अब बदल भी जाओ यार 
पर विक्रम वही का वही

रविवार, 20 जनवरी 2013

चिल्लर (तीसरी किश्त)


1
मेरी गुस्ताख़ नज़रों से जो बच पाओ तो बच लो तुम
नज़र का तीर है इसको कोई पर्दा क्या रोकेगा??
…………………………………………
2
 बड़े अनमोल मोती हैं इन्हे यूं ज़ाया न करो
हर किसी की बात पर यूं मुस्कुराया न करो
इन खंजरों से होना क़त्ल बस मेरा ही हक़ है
मुस्कान के खंजर सब पे यूं चलाया न करो
…………………………………………
3
 तेरी गली से गुजरता हूँ तो आँखें मूँद लेता हूँ
डर है कि तुझे देखा तो रस्ता भूल जाऊंगा
…………………………………………
4
 वो मज़ा और वो सुकून अब नींद मे कहाँ ??
जो तेरी याद मे है जाग के आँसू बहाने में ...
…………………………………………
5
 चमकते चाँद से पूछो पिघलती रात से पूछो
कितने आँसू बहे मेरे ये इस बरसात से पूछो
…………………………………………
6
 मुझे जब नींद आई तो भी मैं सोया नहीं
मेरे ख्वाबों भी तुम मुझको छोड़ जाते हो
…………………………………………
7
 फेहरिस्त-ए-आशिकान मे सबसे ऊपर नाम मेरा लिख दो
मैं इक गुमनाम शायर हूँ, नाम बदनाम मेरा लिख दो
…………………………………………
8
 तेरा ही नूर है मुझमे, तुझे बाहर मे क्यूँ ढूँढूँ
जब तेरी याद आती है, मैं आईना देख लेता हूँ
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9
 वो प्यार करेगी तुमसे, उसे प्यार करने की वजह तो दो
ज़रा दिल साफ करो, उसे दिल मे रहने की जगह तो दो
…………………………………………
10
 तेरे आने से मेरी ज़िंदगी यूं गुलशन है कि
दश्त-ए-ग़म मे भी अब चाहत के फूल खिलते हैं....
…………………………………………
11
 दिल चाहा के तुझको बुला लूँ चुपके से मैं ख्वाबो में
ये भी तो हो न सका लेकिन,मुझे नींद न आई रातों में
…………………………………………
12
 कोई नहीं शरीफ यहाँ, बस शरीफ बनते हैं
नकाब लगाकर ही ये घर से निकलते हैं
किसी के आँसू किसी की हंसी का कारण है
दर्द ओ ग़म से भी लोगों के दिल बहलते हैं
…………………………………………
13
 आधी रात अकेले मे जब नींद नहीं आती हमको
सोच के तेरी बातों को तन्हा मुसकाया करते हैं
…………………………………………
14
 इस लफ्ज को हम जानते थे पहले भी मगर
वो अजनबी हमें प्यार का मतलब सिखा गया
…………………………………………
15
 दिल पर नहीं है ज़ोर, इसको रोक लूँ कैसे
फिर चल पड़ा है देखो मोहब्बत की राह पे
…………………………………………
16
 मैं हूँ दर्द का सौदागर, मैं दर्द बेचता हूँ
जब दर्द न हो तो भरे जख्म कुरेदता हूँ
कहने को तो सुख़न में सुख आता है मगर
यहाँ दुख से भरा हर सुख़नवर देखता हूँ...
…………………………………………
17
 उनकी नफ़रतों से दिल जाने क्यूँ प्यार कर बैठा
बेगुनाही को अपनी ये गुनहगार कर बैठा
करने आए थे कुछ और, और कुछ और  कर बैठे
इश्क़ की बेखुदी मे क्या न जाने यार कर बैठा
…………………………………………
18
 कल राह मे अचानक किसी ने नाम पूछा तो
बेखयाली में हम उनका नाम कह गए
आज जब उन्होने कहा मेरी तारीफ करो तो
जाने हम क्यूँ खुदा का कलाम कह गए
…………………………………………
19
 पुकार लेना मुहब्बत से जो दिल चाहे अकेले में
इन नामों की नुमाईश जहाँ में मगर अच्छी नहीं लगती
…………………………………………
20
 किसी के इश्क में पड़कर भी कभी देखिये "विक्रम"
उसकी बदसलूकी भी अदा इक शोख़ लगती है .
…………………………………………
21
 वो समझेंगे कभी तो, बस तू समझाए जा
बुझाने दे चराग उनको, तू फिर जलाए जा
कहाँ जा रहे हैं वो, खुद उनको नहीं पता
वो सुनें न सुनें राह तू उनको बताये जा
…………………………………………
22
 उनसे कह तो दिया कि तन्हा ही जी लेंगे मगर
तन्हाई में जीना हमें आता ही कहाँ है....
…………………………………………
23
क्या कहें तुमसे कि हमें ग़म है क्यूँ
क्या बताएं तुम्हे ये आँखें नम है क्यूँ
जलने कि है आदत मेरी, चुपचाप जलने दो
मत पूंछो कि इस दिल में जलन है क्यूँ
…………………………………………
24
 कभी खुद की न थी फिक्र, मौत से डर न था मुझे
जब से तू मिला है यार, बड़ा संभल के चलता हूँ
…………………………………………
25
अपनी इन अदाओ से मेरा दिल ले लिया तूने
नज़र से मारकर मुस्कान से ज़िंदा किया तूने
…………………………………………
26
हर तरफ है रोशनी, है हर सू उजाला
सचमुच तेरे शहर की रात अलग है
…………………………………………
27
मेरे सनम, तुम भी कमाल करते हो
खुद जवाब हो फिर भी सवाल करते हो
…………………………………………
28
तरीके कत्ल के जहां मे और भी है मगर
तुम्हारे इस तरीके से मरने में मज़ा है
…………………………………………
29
सौ बार कहा दिल से, तू उनको याद न कर
बहरा है तेरा खुदा उस से फरियाद न कर
नादान है मेरा दिल मेरी इक मानता नहीं
तड़पेगा रात-ओ-दिन ये शायद जानता नहीं
…………………………………………
30
तेरी हर खता-ओ-गुनाह को तो मैं माफ कर दूंगा
पर ये बता क्या भूल मेरी तू भूल पाएगा


पिछली दो किश्तें-

1- कुछ चिल्लर

मंगलवार, 18 दिसंबर 2012

विक्रम


जो कोई पूछता है, कैसा तू इंसान है विक्रम
कभी शैतान है विक्रम कभी भगवान है विक्रम

वो कहते है समझ पाना तुझे मुश्किल बड़ा है यार
तू दिल से दिल मिलाकर देख बड़ा आसान है विक्रम

है मौसम सा मिजाज इसका पल भर मे बदलता है
कभी है जान-ए-महफिल तो कभी बेजान है विक्रम

बुरा न मानिए साहिब इसकी गफलतों का कुछ
चला जाएगा, पल दो पल का बस मेहमान है विक्रम

है इससे ताल्लुक क्या आपका न सोचिए साहिब
है सबसे आशना बस खुद से ही अंजान है विक्रम

सोमवार, 25 जून 2012

वो वक़्त मिलन के...|

ज़माने  बाद आज खुशियाँ दर पे आई,
चंद लम्हों की  मुलाकात संग लाई  

पहनकर सफ़ेद  परियों सा चोला,
आईने के सामने अपनी लटो को खोला।

मिलन की बात पर हम निखर आए थे,
 अचानक आईने में वो नज़र आए थे ।

कहे की ओढ़ लो कोई काली सी ओढ़नी ,
बन जाओ आज तुम मेरी रागिनी।

धड़कने तेज़ मध्यम सी होने लगी,
जब उनकी हथेली हमे छूने लगी ।

आ गए वो हमारे इतने पास,
जितना की धड़कन और होती है सांस।

आहिस्ता-आहिस्ता खुद में जकड़ लिए,
उनकी बाँहों में हम हद तक सिकुड़ गए ।

सहसा कोई आवाज़ कानों में पड़ी,
कोई पुकारा नहीं टिकटिकाई थी घड़ी।

यहीं पे वक़्त मिलन के ख़तम होंना था,
थे करीब इतने अब दूर होना था ।

फिर  उन्ही सख्त राहों पे थे अकेले,
जहाँ पर मुस्कुराकर थे मिले।

वो पल बड़ा भारी सा गुजरा ,
हमारा साया साथ उनका छोड़कर उतरा।

अब हमारी राहें थीं जुदा-जुदा,
कसक उनको भी बहुत थी बाखुदा।

लगा हर ओर धुआं सा है,
कोई एहसास दिल में दबा सा है।

जिंदगी रुकने को थी,
साँसे थमने को थी।

उस पल मेरे दिल में बहुत था दर्द,
हवा ठंडी और मौसम था सर्द ।

खड़े थे स्तब्ध एकटक देखते,
काश ! हम उनको एक बार रोकते।

अपने एहसास को हमने लब्जों से सजा दिया,
हमने गम-ए-दुल्हन को सबसे मिला दिया।

रविवार, 25 मार्च 2012

ख़ता



उसकी इस ख़ता की भी कोई सज़ा नहीं  
मिलने का किया वादा पर वो  मिला नहीं

वो हसीं बात आज उसने ही बोल दी यारो  
जो मेरे दिल मे थी मैंने मगर  कहा नहीं

हाल-ए-दिल खत में तुझे तो मैंने रोज़ लिखा
क़ासिद को खत दिया पर तेरा पता लिखा नहीं  

मेरी खता है जो छूना तुझे चाहूँ मैं मगर
इतना हसीं है तू, क्या तेरी कोई खता नहीं ?

मुझपे पहला पत्थर किसी अपने ने उछाला था   
और तो गैर थे मुझे उनसे कोई गिला नहीं

इन अमीरों के आगे हाथ क्यूँ फैलाये "विक्रम"
ये भी तो इंसान हैं साहब, कोई खुदा नहीं

रविवार, 18 मार्च 2012

सफ़र




हयात-ए-ग़म का ये सफर नहीं आसान मेरे यार, 
यहाँ आएंगे अभी और भी तूफान मेरे यार | 

ज़रा सी तीरगी से हो गए हो हिरासान मेरे यार, 
ज़िंदगी है ये तारीकियों का उनवान मेरे यार |

लड़ना मुश्किलों से है हर इंसान की किस्मत, 
इनसे मोड़ ले जो मुंह वो क्या इंसान मेरे यार??

आधे रास्ते से हारकर तुम लौट जाओगे ??
इस कदर न बनो तुम नादान मेरे यार |

कुछ पल ठहर तू, सांस ले फिर बढ़ा चल आगे  
थक जाये गर तू सफर के दौरान मेरे यार 

मौत तो आनी है, इससे डरता क्यूँ है तू ?
मौत आज़ादी और है ज़िंदगी ज़िंदान मेरे यार |

तू कर्म करता जा और न फल की चिंता कर,
खुद गीता में कहता है तेरा भगवान मेरे यार |

औरों के वादे कसमें सब भुला दो लेकिन, 
करो याद खुद से खुद का पैमान मेरे यार |


सोमवार, 5 मार्च 2012

गुजारिश




बेशक गुज़रो मेरी गली से, मगर नकाब ओढ़ के | 
न गिराओ किसी पर बर्क-ए-हुस्न मुझे छोड़ के |

ये बिजलियाँ मुझ पे गिराओ मैं जलना चाहता हूँ 
हद है तेरा हुस्न, मैं हद से गुजरना चाहता हूँ 

हदें तोड़ जमाने की, मुझ पर एतबार तो कर |
मैंने सौ बार किया, तू भी इक बार तो कर |

तू भी इक बार किसी से प्यार कर के तो देख |
सर्द रात छत पे किसी का इंतज़ार करके तो देख |

किसी का इंतज़ार गर न मज़ा देने लगे तो कहना,
बाद-ए-सबा भी उसका न पता देने लगे तो कहना 

बाद-ए-सबा बनीं क़ासिद-ओ-हमराज़ प्यार मे देखो | 
उड़ा के ले गयी ख़त वो मेरा आज प्यार मे देखो |

ख़त मे था लिखा, जो हवा आई उनके घर छोड़ के |
बेशक गुज़रो मेरी गली से, मगर नकाब ओढ़ के |  


रविवार, 4 मार्च 2012

इम्तिहाँ



तू असलियत में क्या है, आज देख लेते हैं ।
तू है पत्थर या खुदा है, आज देख लेते हैं ।

इम्तिहाँ मेरा लिया तूने रोज़ रोज़ खूब । 
आज तेरा इम्तिहाँ है, आज देख लेते हैं ।

मैं तुझे जानता, पहचानता, मानता नहीं ।
तेरे सच से कौन आशना है, आज देख लेते हैं ।

मैं भरोसा करूँ तेरा, या न करूँ, है मेरी मर्ज़ी
क्या तुझे खुद पे भरोसा है, आज देख लेते हैं ।


मंगलवार, 21 फ़रवरी 2012

दस्तूर



तुझे भूलना मुमकिन भी हो जाता लेकिन 
तेरी याद दिलाने का जहां में दस्तूर बहुत है

न की कद्र तेरी जब थी जानाँ पास तू मेरे 
आज जब कद्र करता हूँ तो तू दूर बहुत है

हमारा इश्क ग़र परवान चढ़ता तो क्यूँ कर
मैं मगरूर बहुत हूँ और तू मजबूर  बहुत है   

सैकड़ो ज़ख्म सह कर भी जी लेता है इंसान 
मगर जाँ लेने को दिल पे इक नासूर बहुत है 

ठुकरा दिया "विक्रम" जिसे वो फिर न मिलेगा 
जहां में किस्सा ये चाहत का मशहूर बहुत है
  

सोमवार, 30 जनवरी 2012

अभी हारा नहीं हूँ मैं..


बेशक हार हुयी है मेरी
पर हारा नहीं हूँ मैं
मुझको लाचार न समझो तुम
बेचारा नहीं हूँ मैं
रुका हूँ, गिरा हूँ, ज़मीं पर पड़ा हूँ
पर ज़िंदा हूँ अभी,
किस्मत का मारा नहीं हूँ मैं
फिर उठूँगा, बढ़ूँगा,
फ़लक तक चढ़ूँगा
मैं  सूरज हूँ,
उगना ढलना आदत है मेरी
टूट के पल में  खो जाये
वो तारा नहीं हूँ मैं
बेशक हार हुयी है मेरी
पर अभी हारा नहीं हूँ मैं.....

रविवार, 1 जनवरी 2012

दिलहार चला आ |


मिलता हूँ हर इक रात मै, राहो पे अकेला |
मिलना जो हो दिलहार से, दिलहार चला |
कहता हूँ सबका दर्द मै , गा-गा के सुरीला |
सुनना जो हो खुद आह को , दिल हार  चला |
बैठेंगे सभी शान से ,बाटेंगे दर्द -ये -गम |
कहना जो हो गम आपको , दिलहार  चला |
खो जाओगे यू राह मे , भटकोगे दर- बदर |
रौशन करू गुम-राह मै  , दिलहार चला |
सुनता हूँ सब की बात मैं ,करता  हूँ  फैसला |
करना जो हो फ़रियाद तो , दिलहार चला |
मिलता हूँ हर इक रात मै, राहो पे अकेला |
मिलना जो हो दिलहार से, दिलहार चला |

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